विश्वकर्मा पूजा
स्कूल, फैक्ट्री और कार्यालय में मशीनों व औज़ारों की भगवान विश्वकर्मा पूजा, विश्वकर्मा जयंती पर।

भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और शिल्प का देवता माना जाता है। इस पूजा में औज़ारों, मशीनों और कार्यस्थल का पूजन किया जाता है।
अवधि: डेढ़ घंटे
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹3,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
कारीगर, उद्योग, स्कूल और कार्यालय अपने काम के साधनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए यह पूजा करते हैं।
कब और किसलिए की जाती है
- विश्वकर्मा जयंती पर कार्यस्थल, फैक्ट्री और कार्यशाला में यह पूजा करने की परंपरा है।
- माना जाता है कि श्रद्धा से किया गया पूजन कार्य में सुरक्षा और सफलता की भावना को बल देता है।
- इससे कर्मचारियों और टीम में एकजुटता और उत्सव का वातावरण बनता है।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. मशीनों और औज़ारों की साफ-सफाई तथा पूजा स्थल की तैयारी।
2. संकल्प, गणपति और कलश पूजन।
3. भगवान विश्वकर्मा का पूजन और औज़ारों पर रोली-अक्षत अर्पण।
4. आरती।
5. प्रसाद वितरण और समापन।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र
- औज़ार या मशीनें (साफ की हुई)
- कलश और नारियल
- रोली, मौली, अक्षत
- फूल-माला
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
विश्वकर्मा जयंती प्रायः सितंबर माह में कन्या संक्रांति के आसपास मनाई जाती है; सही तिथि और समय पंडित जी के साथ तय होगा।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: क्या यह पूजा फैक्ट्री या कार्यालय परिसर में हो सकती है?
उ: हाँ, पंडित जी आपके कार्यस्थल पर आकर पूजा करा सकते हैं।
प्र: कितने कर्मचारी शामिल हो सकते हैं?
उ: पूरी टीम शामिल हो सकती है।
संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in