तुलसी विवाह
तुलसी माता और शालिग्राम भगवान के विवाह की पारंपरिक रस्म, पंडित जी के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न।

तुलसी विवाह में तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु जी के प्रतीक रूप) से पारंपरिक विधि से कराया जाता है।
अवधि: 1 घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹2,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
इसमें तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और शालिग्राम जी को दूल्हे के रूप में स्थापित किया जाता है।
कब और किसलिए की जाती है
- कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी के आसपास यह पूजा करने की परंपरा है।
- माना जाता है कि इस रस्म से घर में मंगल और शांति का भाव बना रहता है।
- कई परिवार इसे विवाह-ऋतु के शुभारंभ के रूप में श्रद्धा से करते हैं।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प और गणपति पूजन।
2. तुलसी जी का शृंगार (चुनरी, बिंदी, चूड़ियाँ) और शालिग्राम जी की स्थापना।
3. विवाह की रस्में: तिलक, माला अर्पण और परिक्रमा। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।
4. आरती और मंगल गान।
5. प्रसाद वितरण और समापन।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- तुलसी का पौधा
- शालिग्राम जी
- रोली, मौली, अक्षत
- चुनरी और सुहाग सामग्री
- फूल-माला
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
देवउठनी एकादशी के बाद का समय परंपरा में प्रचलित है; सटीक तिथि और मुहूर्त पंडित जी के साथ तय किया जाएगा।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: क्या यह पूजा घर के आँगन या छत पर हो सकती है?
उ: हाँ, खुली और स्वच्छ जगह पर तुलसी जी के पास यह रस्म आराम से की जा सकती है।
प्र: इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं?
उ: परिवार, पड़ोसी और मित्र, सभी श्रद्धा से शामिल हो सकते हैं।
संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in