श्राद्ध पूजा

पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि, तर्पण और ब्राह्मण भोजन की पारंपरिक विधि, विशेष रूप से पितृ पक्ष में। लगभग दो घंटे।

श्राद्ध पूजा

श्राद्ध पूजा अपने पूर्वजों को श्रद्धा से स्मरण कर तर्पण और भोजन अर्पित करने की पारंपरिक विधि है।
अवधि: दो घंटे
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹3,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।

यह पूजा क्या है
श्राद्ध में परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करता है और उनके नाम से जल, तिल, भोजन और दान अर्पित करता है। यह कृतज्ञता प्रकट करने की परंपरा है। इसे शांति और आदर के साथ किया जाता है।

कब और किसलिए की जाती है
- पितृ पक्ष में पूर्वज की मृत्यु तिथि के दिन किया जाता है।
- अमावस्या जैसे अवसरों पर भी पूर्वजों के स्मरण में किया जाता है।
- माना जाता है कि श्रद्धा से किया गया तर्पण पितरों को संतुष्टि देता है।

पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प लेकर पितरों का आवाहन किया जाता है।
2. जल, काले तिल और कुश से तर्पण किया जाता है।
3. पिंड या भोग पितरों को अर्पित किया जाता है।
4. गाय, कुत्ते, कौए आदि के लिए भोजन का अंश निकालने की परंपरा निभाई जाती है।
5. ब्राह्मण भोजन कराकर दान-दक्षिणा दी जाती है।
6. प्रार्थना के साथ समापन होता है। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।

आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- काले तिल और कुश
- जौ और चावल
- गंगाजल और शुद्ध जल
- तुलसी दल और पुष्प
- भोजन सामग्री और फल
- दूध, घी और शहद
- वस्त्र और दक्षिणा
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।

शुभ तिथि / मुहूर्त
पितृ पक्ष में मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है; सही तिथि पंडित जी के साथ तय की जाती है।

बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: श्राद्ध किस दिन करना चाहिए?
उ: आम तौर पर पितृ पक्ष में पूर्वज की मृत्यु तिथि पर; तिथि संबंधी शंका हो तो पंडित जी से पूछ लें।

प्र: क्या श्राद्ध घर पर हो सकता है?
उ: जी हाँ, घर पर हो सकता है; कई परिवार नदी या तीर्थ पर भी करते हैं।

संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in

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