षष्ठी पूजन (छठी)
नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन षष्ठी देवी का पूजन और शिशु के मंगल की प्रार्थना।

षष्ठी पूजन, जिसे छठी भी कहते हैं, शिशु के जन्म के छठे दिन की जाने वाली पारंपरिक पूजा है।
अवधि: 1 घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹1,500 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
इसमें षष्ठी देवी का पूजन कर नवजात शिशु और माता के मंगल की प्रार्थना की जाती है।
कब और किसलिए की जाती है
- शिशु के जन्म के छठे दिन यह पूजा करने की परंपरा है।
- माना जाता है कि षष्ठी देवी शिशु की रक्षक हैं, और उनका पूजन श्रद्धा से किया जाता है।
- परिवार में नए सदस्य के स्वागत का यह मंगल अवसर है।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प और गणपति पूजन।
2. षष्ठी देवी का आवाहन और पूजन।
3. शिशु को तिलक और आशीर्वाद।
4. आरती। कुछ क्षेत्रों में कलम-दवात का भी पूजन होता है, जो परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकता है।
5. प्रसाद वितरण।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- षष्ठी देवी का चित्र या प्रतीक
- कलश
- रोली, हल्दी, अक्षत
- मौली
- फूल
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
जन्म के छठे दिन का समय परंपरा में माना जाता है; समय पंडित जी के साथ तय किया जाएगा।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: क्या पूजा घर पर हो सकती है?
उ: हाँ, घर पर माँ और शिशु की सुविधा के अनुसार पूजा कराई जा सकती है।
प्र: क्या माँ का पूजा में बैठना ज़रूरी है?
उ: माँ और शिशु का स्वास्थ्य सर्वोपरि है।
संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in