करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ व्रत की संध्या पूजा, कथा, करवा पूजन और चंद्र अर्घ्य की विधि में पंडित जी की सहायता।

करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घायु और परिवार के सुख की कामना से रखती हैं। इस पूजा में पंडित जी विधि कराते हैं।
अवधि: 1 घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹1,500 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
संध्या में शिव-पार्वती, गणेश जी और करवा माता का पूजन किया जाता है।
कब और किसलिए की जाती है
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत रखने की परंपरा है।
- माना जाता है कि यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
- महिलाएँ मिलकर कथा सुनती हैं और परंपरा का पालन करती हैं।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प और गणपति पूजन।
2. शिव-पार्वती और करवा माता का पूजन।
3. करवा चौथ की कथा का श्रवण।
4. चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य, फिर पारण। चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार बदलता है।
5. प्रसाद वितरण और समापन।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- मिट्टी या धातु का करवा
- छलनी
- रोली, अक्षत, हल्दी
- सिंदूर और सुहाग सामग्री
- दीपक और धूप
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ती है; पूजा का समय पंडित जी के साथ तय किया जाएगा।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: क्या सामूहिक रूप से पूजा हो सकती है?
उ: हाँ, पड़ोस की महिलाएँ और सोसाइटी के लोग मिलकर पूजा और कथा में शामिल हो सकते हैं।
प्र: चंद्रमा न दिखे तो क्या करें?
उ: ऐसे में पंडित जी परंपरा के अनुसार सही विधि बता देंगे।
संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in