जन्माष्टमी पूजा
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर लड्डू गोपाल का अभिषेक, शृंगार, भोग और आरती सहित पूजा।

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व है। इस पूजा में बाल रूप कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है।
अवधि: 1 घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹2,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
इसमें लड्डू गोपाल या कृष्ण प्रतिमा का पंचामृत से स्नान, शृंगार और भोग अर्पण किया जाता है।
कब और किसलिए की जाती है
- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है, जब कृष्ण पूजन की विशेष परंपरा है।
- मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा प्रचलित है।
- माना जाता है कि भक्ति भाव से किया गया पूजन परिवार में आनंद का वातावरण बनाता है।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प और गणपति पूजन।
2. लड्डू गोपाल का पंचामृत और गंगाजल से स्नान।
3. नए वस्त्र, मोरपंख, चंदन और शृंगार।
4. झूला झुलाना, भजन और आरती।
5. माखन-मिश्री का भोग और प्रसाद वितरण।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- लड्डू गोपाल या कृष्ण प्रतिमा
- पंचामृत और गंगाजल
- पीले वस्त्र और मोरपंख
- तुलसी दल
- माखन-मिश्री
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है; पूजा का सही समय पंडित जी के साथ तय किया जाएगा।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: क्या पूजा मध्यरात्रि में हो सकती है?
उ: हाँ, कई परिवार जन्म की बेला में पूजा कराते हैं।
प्र: क्या बच्चे भी शामिल हो सकते हैं?
उ: हाँ, बच्चे झूला झुलाने और आरती में उत्साह से शामिल हो सकते हैं।
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