भूमि पूजन
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि की शुद्धि और पूजन, शिलान्यास की परंपरा के साथ। अवधि लगभग दो घंटे।

भूमि पूजन भवन निर्माण शुरू करने से पहले भूमि माता और वास्तु देवता के पूजन का शुभ अनुष्ठान है।
अवधि: दो घंटे
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹4,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
किसी भी निर्माण से पहले भूमि का आभार प्रकट करने और शुभ शुरुआत के लिए यह पूजा की जाती है। इसमें भूमि, वास्तु देवता और दिशाओं का पूजन होता है। इसके बाद प्रतीक रूप में पहली खुदाई या शिलान्यास किया जाता है।
कब और किसलिए की जाती है
- घर, दुकान, फैक्ट्री या किसी भी भवन की नींव खोदने से पहले की जाती है।
- खेत, प्लॉट या नए निर्माण स्थल के शुभारंभ पर कराई जाती है।
- माना जाता है कि शुद्ध भाव से शुरुआत करने पर निर्माण कार्य शांतिपूर्वक आगे बढ़ता है।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प लेकर गणपति और कलश पूजन किया जाता है।
2. भूमि माता और वास्तु देवता का पूजन होता है।
3. दिशाओं के देवताओं का स्मरण किया जाता है।
4. नींव के स्थान पर कलश, सिक्का, सुपारी आदि रखने की परंपरा है।
5. प्रतीक रूप में कुदाल से पहली खुदाई या शिलान्यास किया जाता है।
6. आरती और प्रसाद के साथ समापन होता है। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- कलश, आम के पत्ते और नारियल
- रोली, मौली और अक्षत
- हल्दी और चंदन
- पुष्प और पुष्प-माला
- सुपारी, सिक्का और नवधान्य
- कुदाल या फावड़ा
- मिठाई और फल
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
भूमि पूजन का शुभ दिन और मुहूर्त पंचांग देखकर पंडित जी के साथ तय किया जाता है।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: भूमि पूजन निर्माण स्थल पर ही होता है?
उ: जी हाँ, पूजा उसी भूमि पर की जाती है जहाँ निर्माण होना है।
प्र: क्या निर्माण शुरू होने से पहले ही पूजा कर लेनी चाहिए?
उ: जी हाँ, आम तौर पर नींव की खुदाई से पहले पूजन किया जाता है।
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